Friday, March 24, 2017

हाँ ,,,,मेरा सपना बहुत बड़ा है,,,,एक सभ्य भारत,,,ससक्त,,भारत,,शिक्षित भारत,,, स्वच्छ भारत,,, बनाने की ,,,जिसकी,,,संस्कृति,,,सम्पूर्ण विस्व में प्रसिद्ध है,,,लेकिन कुछ समय से धूमिल हो रही है,,,हमारे अहम्,,,और,,कुछ अपेक्षा से अधिक पाने की चाहत के कारण ,,,,लेकिन मेरे मन ने कहा आप कुछ कदम तो चलो ,,,आगे निश्चित है कि कुछ कदम आगे साथ होंगे,,,,बस मैंने अपने मन की सुनी। ,,,और आज हम साथ है,,,भले बहुत दूर है मेरी मंजिल अभी भी,,,पर मैं ये कह सकता हु ,,,की लाखों मील के इस सफर में कुछ कदम हमने तय कर लिए है ,,,ये हमारे लिए बहुत हैं,,, बस आगे बढ़ते रहना है,,,क्योकि मेरा सपना ही मेरी पहचान है,,,, Nirmal kumar awasthi Earth Care foundation team Mob...8699208385

हाँ ,,,,मेरा सपना बहुत बड़ा है,,,,एक सभ्य भारत,,,ससक्त,,भारत,,शिक्षित भारत,,, स्वच्छ भारत,,, बनाने की ,,,जिसकी,,,संस्कृति,,,सम्पूर्ण विस्व में प्रसिद्ध है,,,लेकिन कुछ समय से धूमिल हो रही है,,,हमारे अहम्,,,और,,कुछ अपेक्षा से अधिक पाने की चाहत के कारण ,,,,लेकिन मेरे मन ने कहा आप कुछ कदम तो चलो ,,,आगे निश्चित है कि कुछ कदम आगे साथ होंगे,,,,बस मैंने अपने मन की सुनी। ,,,और आज हम साथ है,,,भले बहुत दूर है मेरी मंजिल अभी भी,,,पर मैं ये कह सकता हु ,,,की लाखों मील के इस सफर में कुछ कदम हमने तय कर लिए है ,,,ये हमारे लिए बहुत हैं,,, बस आगे बढ़ते रहना है,,,क्योकि मेरा सपना ही मेरी पहचान है,,,,

Nirmal kumar awasthi
Earth Care foundation team
Mob...8699208385

Friday, March 3, 2017

हमारी,,,प्रकृति का सानिध्य,,, भी एक सम्मोहन की तरह है,,

हमारी प्रकृति,,,इसकी,,सुंदरता सच में जाने कितने सुखद एहसासों का जन्म होता है,,,जिनमे बहकर या इसके समीप रहकर हम भी मिश्री की तरह जल में जैसे निश्छल रूप से घुल जाते है  और उसमें से हम या वो अर्थात विलेय और विलायक मिलकर एक ऐसा विलयन बनाते है,,,की जिसके कण कण में मैं,,मैं घुलकर हम बन जाते है ,,और इसमें से मैं को मैं से पृथक करना जैसे असंभव हो जाता है,,,,,और इसमें खोकर हम अपने सारे आकार,, विकार भूल जाते है,,इसलिए मुझे प्रकृति एक सम्मोहन शास्त्र की तरह लगती है ,,,,जिसका सानिध्य सिर्फ सुखद अनुभवो का एहसास कराता है,,,,

जय श्री कृष्णा

Nirmal kumar awasthi