Saturday, May 27, 2017

विचार,,,,

मनुष्य का अवश्यकता से अधिक,,,हस्तक्षेप,,हमारे परिस्थिक तंत्र को विनाश की और ले जा रहा है,,,
जिसके परिणामस्वरूप हमारे समक्ष,,कई चुनौतियों का सृजन हो चूका है,,,
जैसे कई नदियों का नालों के रूप में तब्दील हो जाना,,,
उपजाऊ खेतो में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग की वजह से बंजर हो जाना,,,
हमारे गाँव और शहरों के कुओ और तालाबों का विलुप्त हो जाना

No comments:

Post a Comment