जो पेड़ कल वायु के वेग के संग हँस रहे थे,,,मुश्करा रहे थे,,आज सीशविहीन रुदन कर रहे है
Nirmal earthcarefoundation
Friday, September 8, 2017
जो पेड़ कल वायु के वेग के संग हँस रहे थे,,,मुश्करा रहे थे,,आज सीशविहीन रुदन कर रहे है Nirmal earthcarefoundation
प्रकृति को क्षत-विक्षत करना आज की परंपरा बन गयी है Nirmal Earthcarefoundation Ngo
प्रकृति को क्षत-विक्षत करना आज की परंपरा बन गयी है
Nirmal Earthcarefoundation Ngo
Sunday, July 2, 2017
छोड़ के दुनियादारी,दो एक पेड़ लगाय। धरती हो हरी भरी,,जीवन स्वस्थ हो जाय।।
छोड़ के दुनियादारी,दो एक पेड़ लगाय।
धरती हो हरी भरी,,जीवन स्वस्थ हो जाय।।
Sunday, June 11, 2017
पानी जीवन डोर है,इसकी हर बूँद बचाओ। बिन नीर जीवन संभव नही,एक अभियान चलाओ।।
पानी जीवन डोर है,इसकी हर बूँद बचाओ।
बिन नीर जीवन संभव नही,एक अभियान चलाओ।।
ऑक्सीजन है पेड़ से,,पेड़ से ही मौसम। बिन पेड़ ना रह पाएंगे,,ना हम,,ना ही ये जीवन।।
ऑक्सीजन है पेड़ से,,पेड़ से ही मौसम।
बिन पेड़ ना रह पाएंगे,,ना हम,,ना ही ये जीवन।।
Saturday, May 27, 2017
हमारी प्राचीन परम्पराये हमारी रीढ़ की हड्डी जैसे है
हमारी प्राचीन परम्पराये हमारी रीढ़ की हड्डी जैसे है
जैसे बिना रीढ़ के हमारा शरीर आकारहीन है ठीक उसी प्रकार अपनी प्राचीन परम्पराओं के बिन हम अधूरे है,,,
जैसे बिना रीढ़ के हमारा शरीर आकारहीन है ठीक उसी प्रकार अपनी प्राचीन परम्पराओं के बिन हम अधूरे है,,,
सैन फ्रांसिस्को दुनिया का पहला शहर बन गया है, जहां बोतलबंद पानी की बिक्री रोक दी गई है ..नौ महीने चली बहस के बाद .. ये निर्णय हुआ कि नागरिक अपनी बोतल में... मुफ्त पानी उपलब्ध कराने वाले पॉइंट से पानी ले सकते हैं... बहस में उन्होंने माना ... कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त जीवन के लिए अत्यावश्यक ... जल का बाजारीकरण नहीं होना चाहिए ... अफ़सोस हिंदुस्तान में लोग जहां प्याऊ चलवाते थे ... कुंए, तालाब खुदवाते थे ... वहां विदेशी कम्पनी लूट रही हैं ... और सैन फ्रांसिस्को हिन्दुस्तानी विचारधारा अपना रहा है ... कि पानी कभी बेचा नहीं जाना चाहिए ....!
यदि उक्त लेख आपको उपयुक्त लगे तो इसे यथासंभव विस्तारित कर भूखे को रोटी और प्यासे को पानी देने की हमारी प्राचीन परंपरा को संबल दे ।
यदि उक्त लेख आपको उपयुक्त लगे तो इसे यथासंभव विस्तारित कर भूखे को रोटी और प्यासे को पानी देने की हमारी प्राचीन परंपरा को संबल दे ।
विचार,,,,
मनुष्य का अवश्यकता से अधिक,,,हस्तक्षेप,,हमारे परिस्थिक तंत्र को विनाश की और ले जा रहा है,,,
जिसके परिणामस्वरूप हमारे समक्ष,,कई चुनौतियों का सृजन हो चूका है,,,
जैसे कई नदियों का नालों के रूप में तब्दील हो जाना,,,
उपजाऊ खेतो में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग की वजह से बंजर हो जाना,,,
हमारे गाँव और शहरों के कुओ और तालाबों का विलुप्त हो जाना
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