Friday, October 20, 2017

पता नहीं हम क्यों नही जानते हुए भी ये समझना नहीं चाहते कि हमें अपनी जननी स्वरूप धरती माता के अनुसार बदलना चाहिए,, प्रकृति जो हमारे लिए जीवनदायिनी है उसका पोषण,,और उसका संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है ,,,पर अब हमें शायद आदत सी पड़ गयी है हर नियम,,,हर कानून में कारण निकालने की ,,,हम शायद अपने शास्त्रों में लिखित परिभाषाओं को भूल रहे है ,,,या जानते हुए भी उनको भूलने का ढोंग करने पर विवश है,,,और इसी हठ या विवशता की वजह से हम अपना भविष्य जो हमारे बच्चों के रूप में हैं उसको अंधकार में धकेल रहे है ,,, मैं ये भी जानता हूँ कि ये लेख पढ़ने के बाद कई लोग मुझसे सवाल जवाब करेंगे ,,तो उनसे मेरा बस यही एक सवाल,,,की हम अपने पूर्वजों से कैसा हरा भरा वातावरण उपहार स्वरूप प्राप्त किये,,,पर अपने बच्चों को हम क्या देकर जाने वाले है ना पीने लायक पानी ना सांस लेने लायक हवा ना रहने लायक घर ना ही संस्कार ना सभ्यता ना ही आचार विचार ना रिश्तों की महत्ता फिर क्या जरा आंख बंद करके विचार कीजियेगा 2050 का भारत कैसा होगा ये चुनौती हम सब के सामने है Nirmal Earthcarefoundation Ngo www.earthcarengo.org 8699208385

पता नहीं हम क्यों नही जानते हुए भी ये समझना नहीं चाहते कि हमें अपनी जननी स्वरूप धरती माता के अनुसार बदलना चाहिए,, प्रकृति जो हमारे लिए जीवनदायिनी है उसका पोषण,,और उसका संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है ,,,पर अब हमें शायद आदत सी पड़ गयी है हर नियम,,,हर कानून में कारण निकालने की ,,,हम शायद अपने शास्त्रों में लिखित परिभाषाओं को भूल रहे है ,,,या जानते हुए भी उनको भूलने का ढोंग करने पर विवश है,,,और इसी हठ या विवशता की वजह से हम अपना भविष्य जो हमारे बच्चों के रूप में हैं उसको अंधकार में धकेल रहे है ,,,
मैं ये भी जानता हूँ कि ये लेख पढ़ने के बाद कई लोग मुझसे सवाल जवाब करेंगे ,,तो उनसे मेरा बस यही एक सवाल,,,की हम अपने पूर्वजों से कैसा हरा भरा वातावरण उपहार स्वरूप प्राप्त किये,,,पर अपने बच्चों को हम क्या देकर जाने वाले है

ना पीने लायक पानी
ना सांस लेने लायक हवा
ना रहने लायक घर
ना ही संस्कार
ना सभ्यता
ना ही आचार विचार
ना रिश्तों की महत्ता

फिर क्या
जरा आंख बंद करके विचार कीजियेगा
2050 का भारत कैसा होगा
ये चुनौती हम सब के सामने है

Nirmal Earthcarefoundation Ngo
www.earthcarengo.org

8699208385

Friday, September 8, 2017

जाने कितनों का घर उजाड़ा मैंने,,,,एक वृक्ष को काटकर के

जाने कितने पाप किये,,,सारे अपने आप किये,,
इसको तोड़ा,, उसको मरोड़ा,,कितनों को झकझोर दिए,,
हरियाली से रही घृणा,
मन की ना मिट पायी तृष्णा,,
प्यास थी जाने कैसी वो,,
पशुओं,,पक्षियों के श्राप लिए,,,
कल बाग़ हुआ करती थी यहाँ,,
गोरैया की किलकारी थी,,,
जब भी गुजरता था उस राह में तो,,
गिलहरी की देखती रहती थी,,,
चींटियों का भी झुण्ड,,उस राह से रोज गुजरता था,,
बिन शब्द कहे,,मैं बिन बोले,,जाने क्या बाते करता था,,
पक्षी भी थे,,गिलहरी थी,,चींटी भी थीं,, घोंसले भी थे,,
शायद ये उनका साथ ही था,,उनको मुझपर विस्वास भी था,,
उन पेड़ों उनका घरौंदा था,,,जिनको हमने काट दिए,,
वो रोये बहुत चिल्लाये थे,,,हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाए थे,,
हम हज़ारों है हम कहाँ जाये,,
जिन घोंसलों को बनाया है,,
इस पेड़ को मैंने सजाया है,,
इनमे मेरे अपने है,,,जाने कितनों के सपने है
जीवन भर का अरमान है
और इसमें बसे हमारे प्राण है
मैं था मनुष्य,,,था प्रतिघाती,,
विस्वास से मुझे था क्या लेना,,
मैंने उन पेड़ो को काट दिया,,
उन हज़ारों रोते हुए जीवों के,,,
हाँ जीवन में अन्धकार किया,,

जाने कितने पाप किये,,,सारे अपने आप किये,,
इसको तोड़ा,, उसको मरोड़ा,,कितनों को झकझोर दिए,,

जो पेड़ कल वायु के वेग के संग हँस रहे थे,,,मुश्करा रहे थे,,आज सीशविहीन रुदन कर रहे है Nirmal earthcarefoundation

जो पेड़ कल वायु के वेग के संग हँस रहे थे,,,मुश्करा रहे थे,,आज सीशविहीन रुदन कर रहे है
Nirmal earthcarefoundation

प्रकृति को क्षत-विक्षत करना आज की परंपरा बन गयी है Nirmal Earthcarefoundation Ngo

प्रकृति को क्षत-विक्षत करना आज की परंपरा बन गयी है
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

Sunday, July 2, 2017

छोड़ के दुनियादारी,दो एक पेड़ लगाय। धरती हो हरी भरी,,जीवन स्वस्थ हो जाय।।

छोड़ के दुनियादारी,दो एक पेड़ लगाय।
धरती हो हरी भरी,,जीवन स्वस्थ हो जाय।।

Sunday, June 11, 2017

पानी जीवन डोर है,इसकी हर बूँद बचाओ। बिन नीर जीवन संभव नही,एक अभियान चलाओ।।

पानी जीवन डोर है,इसकी हर बूँद बचाओ।
बिन नीर जीवन संभव नही,एक अभियान चलाओ।।

ऑक्सीजन है पेड़ से,,पेड़ से ही मौसम। बिन पेड़ ना रह पाएंगे,,ना हम,,ना ही ये जीवन।।

ऑक्सीजन है पेड़ से,,पेड़ से ही मौसम।
बिन पेड़ ना रह पाएंगे,,ना हम,,ना ही ये जीवन।।

Saturday, May 27, 2017

हमारी प्राचीन परम्पराये हमारी रीढ़ की हड्डी जैसे है

हमारी प्राचीन परम्पराये हमारी रीढ़ की हड्डी जैसे है
जैसे बिना रीढ़ के हमारा शरीर आकारहीन है ठीक उसी प्रकार अपनी प्राचीन परम्पराओं के बिन हम अधूरे है,,,
सैन फ्रांसिस्को दुनिया का पहला शहर बन गया है, जहां बोतलबंद पानी की बिक्री रोक दी गई है ..नौ महीने चली बहस के बाद .. ये निर्णय हुआ कि नागरिक अपनी बोतल में... मुफ्त पानी उपलब्ध कराने वाले पॉइंट से पानी ले सकते हैं... बहस में उन्होंने माना ... कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त जीवन के लिए अत्यावश्यक ... जल का बाजारीकरण नहीं होना चाहिए ... अफ़सोस हिंदुस्तान में लोग जहां प्याऊ चलवाते थे ... कुंए, तालाब खुदवाते थे ... वहां विदेशी कम्पनी लूट रही हैं ... और सैन फ्रांसिस्को हिन्दुस्तानी विचारधारा अपना रहा है ... कि पानी कभी बेचा नहीं जाना चाहिए ....!
यदि उक्त लेख आपको उपयुक्त लगे तो इसे यथासंभव विस्तारित कर भूखे को रोटी और प्यासे को पानी देने की हमारी प्राचीन परंपरा को संबल दे ।

विचार,,,,

मनुष्य का अवश्यकता से अधिक,,,हस्तक्षेप,,हमारे परिस्थिक तंत्र को विनाश की और ले जा रहा है,,,
जिसके परिणामस्वरूप हमारे समक्ष,,कई चुनौतियों का सृजन हो चूका है,,,
जैसे कई नदियों का नालों के रूप में तब्दील हो जाना,,,
उपजाऊ खेतो में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग की वजह से बंजर हो जाना,,,
हमारे गाँव और शहरों के कुओ और तालाबों का विलुप्त हो जाना

Why is it so hot???

☀Why is it so hot??? ☀

Pls. forward this message to all your friends and request them to forward it .

VERY IMPORTANT:
Max Temperatures recorded in some Indian cities:

☀Lucknow 47 degrees
☀Delhi 47 degrees
☀Agra 45 degrees
☀Nagpur 49 degrees
☀Kota 48 degrees
☀Hyderabad 45 degrees
☀Pune 42 degrees
☀Ahmedabad 46 degrees
☀ Mumbai 42 degrees
☀ Nashik 40 degrees
☀Bangalore 40 degrees
☀ Chennai 45 degrees

Next years these cities will cross 50 degrees. Even AC or fan will not save you in summer..

Why is it so hot ???

In last 10 years over 10 crore trees were cut for widening roads and highways.

But not more than a lakh trees has been planted by govt. or public.

How to make India cool ???

Please do not wait for government to plant trees.

Sowing seeds or planting trees does not cost much.

Just collect seeds of Shatavari, Bel, Peeple, Tulsi, mango, Lemon, Jamun, Neem, Custard Apple, Jack fruit, etc.

Then dig two-three inch hole on open spaces, roadside, footpaths, highways, gardens and also in your society or bungalow.

Bury these seeds in each hole with soil and then water them every two days in summer.

In rainy season no need to water them.

After 15 to 30 days small plants will be born. 

Please nurture them and ensure they grow big.

Let us make this a National movement and plant 10 crore trees all over India.

We should stop temperature from crossing 50 degrees.....

Please plant maximum trees and forward this message to everyone. Lets distribute saplings as return gifts during functions, birthdays etc.          
1 plant 1 whtsapp ...we will easily reach 10 cr plant.      🌹🌹Requests to All🌹🌹

🌿🌴🌳🌲🌻🌲🌳🌴🌿

Thursday, May 18, 2017

विचार,,,

हम हर किसी की मदद नही कर सकते,,परंतु,,,हर कोई किसी ना किसी की मदद कर सकता है

रोनाल्ड रीगन

Monday, May 8, 2017

Plantation programme with alliance international

We have conducted plantation programme,,,with,, ALLIANCE,, INTERNATIONAL,,,,GREAT MOMENTS FOR US WE ARE ENJYOING WITH PLANTS ,,,
THEREFORE PLEASE PLANT TREE IN UNIVERSE,,,,,
GO GREEN
LIVE GREEN
TALK GREEN
WALK GREEN
&
&
LOVE GREEN

EARTH CARE FOUNDATION TEAM

Friday, March 24, 2017

हाँ ,,,,मेरा सपना बहुत बड़ा है,,,,एक सभ्य भारत,,,ससक्त,,भारत,,शिक्षित भारत,,, स्वच्छ भारत,,, बनाने की ,,,जिसकी,,,संस्कृति,,,सम्पूर्ण विस्व में प्रसिद्ध है,,,लेकिन कुछ समय से धूमिल हो रही है,,,हमारे अहम्,,,और,,कुछ अपेक्षा से अधिक पाने की चाहत के कारण ,,,,लेकिन मेरे मन ने कहा आप कुछ कदम तो चलो ,,,आगे निश्चित है कि कुछ कदम आगे साथ होंगे,,,,बस मैंने अपने मन की सुनी। ,,,और आज हम साथ है,,,भले बहुत दूर है मेरी मंजिल अभी भी,,,पर मैं ये कह सकता हु ,,,की लाखों मील के इस सफर में कुछ कदम हमने तय कर लिए है ,,,ये हमारे लिए बहुत हैं,,, बस आगे बढ़ते रहना है,,,क्योकि मेरा सपना ही मेरी पहचान है,,,, Nirmal kumar awasthi Earth Care foundation team Mob...8699208385

हाँ ,,,,मेरा सपना बहुत बड़ा है,,,,एक सभ्य भारत,,,ससक्त,,भारत,,शिक्षित भारत,,, स्वच्छ भारत,,, बनाने की ,,,जिसकी,,,संस्कृति,,,सम्पूर्ण विस्व में प्रसिद्ध है,,,लेकिन कुछ समय से धूमिल हो रही है,,,हमारे अहम्,,,और,,कुछ अपेक्षा से अधिक पाने की चाहत के कारण ,,,,लेकिन मेरे मन ने कहा आप कुछ कदम तो चलो ,,,आगे निश्चित है कि कुछ कदम आगे साथ होंगे,,,,बस मैंने अपने मन की सुनी। ,,,और आज हम साथ है,,,भले बहुत दूर है मेरी मंजिल अभी भी,,,पर मैं ये कह सकता हु ,,,की लाखों मील के इस सफर में कुछ कदम हमने तय कर लिए है ,,,ये हमारे लिए बहुत हैं,,, बस आगे बढ़ते रहना है,,,क्योकि मेरा सपना ही मेरी पहचान है,,,,

Nirmal kumar awasthi
Earth Care foundation team
Mob...8699208385

Friday, March 3, 2017

हमारी,,,प्रकृति का सानिध्य,,, भी एक सम्मोहन की तरह है,,

हमारी प्रकृति,,,इसकी,,सुंदरता सच में जाने कितने सुखद एहसासों का जन्म होता है,,,जिनमे बहकर या इसके समीप रहकर हम भी मिश्री की तरह जल में जैसे निश्छल रूप से घुल जाते है  और उसमें से हम या वो अर्थात विलेय और विलायक मिलकर एक ऐसा विलयन बनाते है,,,की जिसके कण कण में मैं,,मैं घुलकर हम बन जाते है ,,और इसमें से मैं को मैं से पृथक करना जैसे असंभव हो जाता है,,,,,और इसमें खोकर हम अपने सारे आकार,, विकार भूल जाते है,,इसलिए मुझे प्रकृति एक सम्मोहन शास्त्र की तरह लगती है ,,,,जिसका सानिध्य सिर्फ सुखद अनुभवो का एहसास कराता है,,,,

जय श्री कृष्णा

Nirmal kumar awasthi